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कोरोना का कहर ! दुकानों में नही दिख रही है चाइनीज पिचकारी और रंग , होली हुआ खर्चीली , बिहार में बड़ा असर

कोरोना का कहर ! दुकानों में नही दिख रही है चाइनीज पिचकारी और रंग , होली हुआ खर्चीली , बिहार में बड़ा असर

पटना । होली पर भी कोरोना का असर पड़ा है। कोरोना वायरस की वजह से चीन से सप्लाई प्रभावित है। इसका असर बिहार के बाजार पर भी पड़ा है। कोरोना वायरस की वजह से चाइनीज सामानों से दुकानदार दूरी बना रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर, भागलपुर समेत अन्‍य जिलों के स्थानीय बाजार से चाइनीज पिचकारी, रंग, अबीर आदि लगभग गायब हैं।
दुकानदारों की मानें तो चाइनीज सामानों का कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। बाजार सूत्रों की मानें तो होली के करोड़ों रुपये के चाइनीज सामान आयातकों के पास फंसे पड़े हैं, जिसे बिहार आना था। माल फंसने की वजह से दुकानदार उठाए ही नहीं हैं। वहीं, इस बार होली पर चार दिन बाजार बंद रहेंगे। रविवार से लेकर बुधवार तक बाजार बंद रहेंगे।
कोरोना के असर से होली हुई खर्चीली
चीन में कोरोना वायरस के संक्रमण का असर इस बार होली के बाजार पर भी देखने को मिल रहा हैै। इस बार बाजार से चाइनीज पिचकारियां, रंग और फैंसी आइटम गायब हो चुके हैं। हालांकि इस बार की होली फीकी ना हो, इसके लिए भारतीय कंपनियों ने होली के लिए भरपूर उत्पाद बाजार में उतार दिए हैं। हालांकि सप्लाई घटने का असर कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
चाइनीज पिचकारी का नया वर्जन गायब
पटना सिटी की मंडी में होली को लेकर सजे पिचकारी बाजार में चाइनीज पिचकारी का नया वर्जन नहीं आ सका है। गुजरे साल की बची पिचकारी के खरीदार भी नहीं मिल पा रहे हैं। चाइना का स्प्रे रंग बेकार पड़ा है। ग्राहकों का आकर्षण एक बार फिर देसी रंगों के प्रति बढ़ा है। दुकानदार ननकी मिश्रा की मानें तो ऐसे में अकेले मच्छरहट्टा मंडी में चाइनीज आइटम का लगभग 45 लाख रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
ग्राहक चाइनीज सामान से कर रहे परहेज
ग्राहक चीन से आयातित सामान खरीदने से परहेज कर रहे हैं। मंडी में कोलकाता व मुंबई से चाइनीज पिचकारी मंगा कर कारोबार करने वाले आधा दर्जन कारोबारियों का कहना है कि बीते वर्ष अक्टूबर से ही चाइनीज पिचकारी व खिलौना की आवक नहीं हुई है। जो पुराना स्टॉक है, उसे ही बेचा जा रहा है। कारोबारियों की मानें तो पिचकारी के बाजार में चाइनीज आइटम का लगभग 35 लाख रुपये का कारोबार होता है। पुराना स्टॉक कम होने की स्थिति में कीमत भी 25 परसेंट तक बढ़ चुकी है।
इस बार सिर्फ हर्बल देसी रंग
गांधी मैदान में अपनी दुकान लगाने वाले रमेश सिंह ने बताया कि इस बार चाइनीज रंग और अन्य सामान नहीं आया है। रमेश की मानें तो उन्होंने खुद भी इस बार चाइनीज सामान के लिए ऑर्डर नहीं किया था। उन्होंने बताया कि इस साल सिर्फ हर्बल देसी रंग और भारतीय कंपनियों के ही उत्पाद बेच रहे हैं। उनका कहना है कि चाइनीज रंग बाजार में नहीं होने का त्योहार पर ज्यादा असर नहीं है। 
ग्राहक भी नहीं ले रहे चाइनीज सामान
कोरोना वायरस का असर दुकानदारों के साथ-साथ ग्राहकों की सोच पर भी पड़ा है। इन दिनों होली के बाजार में खरीदारी के लिए आए लोग भी चीनी उत्पादों से तौबा कर रहे हैं। यही कारण है कि इन दिनों ग्राहक दुकान पर आते ही सबसे पहले लोकल मेड उत्पाद दिखाने की मांग करते हैं। बोरिंग रोड में पिचकारी खरीदने आए सुरेश कुमार बताते हैं कि चीन में फैले संक्रमण के चलते पहले से ही भारतीय उत्पाद खरीदने का मूड बनाए हुए हैं।
स्प्रे रंग भी बाजार से गायब 
मंडी के कारोबारियों की मानें तो चाइनीज आइटम में खुशबू व झाग वाला स्प्रे रंग इस बार मंडी में नहीं आया है। पुराने स्टॉक को बेचा जा रहा है। पुराने स्प्रे रंग का इस्तेमाल करने से लोग परहेज कर रहे हैं। इस कारण भी ग्राहकों की बाजार से दूरी बनी है। कारोबारियों की मानें तो खुशबू व झाग वाले स्प्रे रंग का कारोबार 12 लाख रुपये से अधिक का होता था। इस बार वो भी अब नहीं हो पायेगा। स्थानीय स्तर पर बने रंग को खरीदार तरजीह दे रहे हैं। बाजार में स्प्रे रंग 50 से 250 रुपये प्रति पीस उपलब्ध है। होली के बाजार में डिजाइनर पिचकारी से लेकर मल्टी कलर के गुब्बारे तथा रंग और कलर स्प्रे चीन से बन कर आते थे। इस बार चीन से इन उत्पादों का आयात नहीं किया जा सका है। होली से जुड़े सामान बेचने वाले विजय कुमार का कहना है कि इस बार पर्व का बजट दोगुना तक हो सकता है।
पटना से ही जाता अन्‍य जिलों में होली सामग्री
बता दें कि पटना से ही होली के सामान बिहार के अन्‍य जिलों में बिकने के लिए जाते हैं। चाहे मुजफ्फरपुर की बात हो अथवा भागलुपर-गया की बात हो। दरभंगा, गोपालगंज, मधुबनी की भी कमोबेश यही स्थिति है। चाइनीज पिचकारी व रंगों से लोग परहेज कर रहे हैं। खासकर, नेपाल से सटे बिहार के बॉर्डर इलाके में तो चाइनीज होली प्रोडक्‍ट को बिल्‍कुल ही परहेज कर रहे हैं।

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