शिक्षा जगत के मशहूर सख्शियत डॉ मोहम्मद लुक़मान सल्फी का निधन।

उनकी लिखी किताब कई देशों के विश्वविद्यालय में पढ़ाये जाते हैं।

उनकी इल्मी सलाहियत और खिदमत को देखते हुए सऊदी अरब की सरकार ने उनको नागरिकता दे रखी है।

सिकरहना।अब्दुस्समद

जामिया इमाम इब्न तैमिया चंदन बारा शीक्षण संस्थान के संस्थापक  और कुलपति डॉ मोहम्म  लुकमान सलफी का 78 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से जामिया इमाम इब्न तैमिया, चंदन बारा गांव और जिला के शीक्षा जगत में एक शोक पसरा हुआ है। विदित हो कि डॉ लुकमान सलफ़ी का जन्म 1942 को ढाका के चंदन बारा गांव में हुई। उनके पिता का नाम मो बारकल्लाह था। गरीब परिवार में पले बढ़े लेकिन शिक्षा के प्रति उनकी लगन ने उन्हें शिक्षा जगत में शिखर तक पहुंचा दिया और एक विद्वान का नाम दिया। दरभंगा सलाफिया से शिक्षा प्राप्ति के बाद वह सऊदी अरब गए और सऊदी अरब के मदीना विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। 
सऊदी हुकूमत ने उन्हें अपने यहां ही शैक्षणिक कार्य के लिए रख लिया। धीरे-धीरे उनके व्यक्तित्व में निखार आता गया और देखते ही देखते पूरी दुनिया में उनकी शोहरत होने लगी। इसी बीच डॉक्टर लुकमान सल्फी ने चंदन बारा  गांव में एक इस्लामिक शिक्षण संस्थान की बुनियाद रखी और उनकी मेहनत ने उस शिक्षण संस्थान को भी पूरी दुनिया में मशहूर कर दिया और आज इस शिक्षण संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने वाले भारत सहित पूरी दुनिया में अपनी शैक्षणिक योग्यता का लोहा मनवा रहे हैं। मरहूम ने सैकड़ों पुस्तकें लिखी जो बहुत सारे मदरसों के पाठ्यक्रम में शामिल है। जिनमें विशेष कर तैसिरू  रहमान ले बयानिल कुरान और मश अले राह आदि शामिल हैं। उनके निधन पर जामिया के डायरेक्टर जनरल अब्दुर रहमान तैमी, मौलाना अरशद मदनी, अबुलकैस मदनी, आसिफ तनवीर तैमि, विधान पार्षद डॉक्टर खालिद अनवर, ढाका के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉक्टर सगीर अहमद आदि ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

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