संस्कृति उत्थान समिति, सहरसा के बैनर तले नागरिकता संसोधन कानून पर लोक जागरण - संवाद कार्यक्रम का किया गया आयोजन

सहरसा: (अमीर झा ) संस्कृति उत्थान समिति, सहरसा के बैनर तले नागरिकता संसोधन कानून पर  लोक जागरण - संवाद कार्यक्रम का आयोजन जिला संपर्क प्रमुख विवेक विशाल के द्वारा सहरसा कहरा कुटी स्थित मंगलम मैरेज रिसोर्ट में प्रो दीपनारायण यादव जी के अध्यक्षता, प्रो विनय कुमार चौधरी जी के संचालन एवं मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्री धरणीधर झा एवं मुख्या वक्ता आर एस एस के क्षेत्रीय प्रचारक श्री रामदत्त चक्रधर जी के उपस्थिति में आयोजित किया गया | सभी अतिथियों का स्वागत आर एस एस के संपर्क प्रमुख श्री विवेक विशाल जी के द्वारा एवं मंगलगान पंडित नविन जी एवं राघव जी ने  किया| जहाँ प्रो विभु शेखर झा की मैथिलि पुस्तक अपन चिकित्सा का लोकार्पण किया गया |
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता रामदत्त चक्रधर जी ने कहा की भारत का विभाजन धर्म के आधार पर किया गया था और पूर्व और पश्चिम पकिस्तान (इस्लामिक बहुमत वाले राज्यों ) में छोरे गए धार्मिक अल्पसंख्यको को शुरू से ही धर्म के आधार पर लगातार धर्म के आधार पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा |विभाजन के दौरान, हमारे राष्ट्र में इन अल्पसंख्यकों के लिए एक प्रतिबद्धता दी की भारत उनके जीवन और स्वतन्त्रता की रक्षा करेगा| १९५० के अंदर नेहरू लियाकत समझौता हुआ जिसमे दोनों देशो में रह रहे  अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का जवाबदेही वहां की सरकार को करनी थी \ इस विषय का भारत ने अक्षरसह पालन किया परन्तु पकिस्तान अफगानिस्तान एवं बांग्लादेश ने इस समझौते को स्वीकार नहीं किया जिसका नतीजा यह है की वहाँ की अल्पसंख्यक हिन्दू की आबादी बहुत ही चिंतनीय हो गई है |धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए, जो अपने ही देश में अपनी धार्मिक पहचान के कारण उत्पीड़न के शिकार है उनके संरक्षण के लिए किसी भी करवाई ने भारत में सेंध धर्मनिरपेक्षता को नहीं जीता है, क्योंकि इसके विपरीत दवा किया जा रहा है | सबसे बड़ी बात की नागरिकता संसोधन कानून किसी को नागरिकता देता है न की किसी की नागरिकता छिनता  है | वर्तमान समय देश की हालत चिंता योग्य है क्योकि कुछ देश विरोधी तत्व द्वारा देश को जलाने की साजिस की जा रही है इससे देशवासियों को बचने की जरुरत है |
वहीँ सम्बोधित करते न्यायमूर्ति धरणीधर झा ने कहा की नागरिकता संसोधन कानून को लेकर देश में विभिन्न तरह की भ्रांतियां फैलाई जा रही है| देश घुसपैठियों से भरा पड़ा है, यह देश कोई धर्मशाला नहीं है जो कोई भी गलत तरीको से आकर कही बस जाएगा | नागरिकता संसोधन कानून को हथियार बना कर कुछ देश विरोधी लोग भारत को वही पुरानी जगह लाना चाहती है , यह कानून को लेकर किसी मुख्यमंत्री द्वारा यह कहना की हम इसे अपने राज्य में लागू नहीं होने देंगे यह कहना शर्मनाक है यह किसी मुख्यमंत्री के हाथ में है भी नहीं | देश विरोधी आवाज देकर कोई समाज को तोरे यह बहुत खतरनाक है | किसी भी देश के किसी भी धर्म का विदेशी नागरिक भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है  यदि वह नागरिकता अधिनियम १९५५ की धरा ६ के अनुसार ऐसा करने के लिए पात्र  है | इस कानून का सभी देश वासियों को समर्थन करना चाहिए | क्योकि यह कानून वैसे लोगो को नागरिकता देती है जो इस्लामिक देश के प्रताड़ित अल्पसंख्यक  है जो किसी तरह भारत भाग के आये है |
वही प्रो दीपनारायण यादव जी ने कहा की नागरिकता संसोधन कानून परोसी देशों से सताए हुए अल्पसंख्यकों को नागरिकता देता है जो जनकल्याणकारी कानून है | राष्ट्र हित जिन्हें पसंद नहीं वो इसे देश विरोधी व मुश्लिम विरोधी कानून बताकर देश की संपत्ति को नुक्सान पंहुचा रहे है | यह देश विरोधी लोगों की चाल है | सरकार का विरोध करने वाले आज देश विरोधी बन देश को विद्रोह की आग में झोंकना चाह रहा है | लोगों को नागरिकता संसोधन कानून का समर्थन करना चाहिए चूँकि यह कानून किसी को नागरिकता देता है न की छीनता है कार्यक्रम में विभाग प्रचारक आर एस एस कोसी संतोष जी, डॉ रवींद्र सिंह जी, डॉ मुरारी जी,उमाशंकर खां, आशीष टिंकू जी, रूपेश जी, गोलु जी, डॉ गोपाल शरण सिंह, डॉ ऐ के चौधरी, डॉ आलोक रंजन, दिवाकर सिंह, सुरेंद्र यादव, लाजवंती झा, माधव चौधरी, डॉ रवि, डॉ शैलेन्द्र, कृष्ण मुरारी प्रसाद, श्यामल पोद्दार, ज्ञानू, सहित कई लोग उपस्थित हुए।

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