गलवान घाटी में विश्वासघात का विरोध, होटलों के बाहर लगाया चायनीज टूरिस्ट नॉट एलाऊ का नोटिस


बोधगया.
बिहार के बोधगया में स्थित महाबोधी मंदिर में हर साल हजारों चीनी नागरिक भगवान बुद्ध के दर्शन करने आते हैं। पहले गया के लोग चीनी नागरिकों का अतिथि देवो भव: के संस्कार के अनुरूप स्वागत सम्मान करते थे, लेकिन चीन ने लद्दाख के गलवान घाटी में जो विश्वासघात किया उससे स्थिति बदल गई है।

भारत-चीन के बीच एलएसी पर चीनी सैनिकों के साथ हुए संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। इसके विरोध में बोधगया के होटलों के मालिकों ने फैसला किया है कि अब वे चीनी सैलानियों का बहिष्कार करेंगे। इसके लिए होटल के बाहर नोटिस भी लगा दिया गया है। नोटिस पर चायनीज टूरिस्ट नॉट एलाऊ और बायकॉट चाइना गेस्ट लिखा है।


बोधगया होटल एसोसिएशन के महासचिव सुदामा कुमार ने कहा कि इंडो-चीन एलएसी बॉर्डर पर गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने भारतीय वीर सैनिकों पर पिछले दिनों घात लगाकर हमला किया था, जिससे हमारे बीस जवान शहीद हो गए। निश्चय ही उनका यह कायराना हरकत है और विश्वासघात के तहत बातचीत के लिए गए देश के सैनिकों पर हमला किया गया।

चीन की हरकत की समूचे विश्व मे निंदा हो रही है। अमेरिका, रूस, जापान जैसे समृद्ध राष्ट्र समेत दुनियाभर के देश आज भारत के पक्ष में खड़े हैं। साथ ही कोरोना महामारी फैलाने के लिए भी चीन की दुनियाभर में किरकिरी हो रही है। बोधगया होटल एसोसिएशन ने कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स एसोसिएशन के साथ मिलकर देशहित में चीनी उत्पादों और चीनी पर्यटकों का बोधगया में बहिष्कार का निर्णय लिया है।

दुनियाभर के बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए बोधगया आस्था का केंद्र है। इसी जगह भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यही कारण है कि दुनियाभर से बौद्ध धर्म के लोग महाबोधी मंदिर आते हैं। चीन में बौद्ध धर्म को मानने वालों की बड़ी संख्या है।

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