मां के निधन के बाद पिता की गैरहाजिरी में बेटियों ने दी मुखाग्नि, घर मे फूटी कौड़ी नहीं थी तो गुल्लक तोड़ अंतिमसंस्कार के लिए पैसों का किया इंतजाम

CHHAPRA : (पन्नालाल कुमार) लॉकडाउन ने बेटियों को इतना साहसी बना दिया है कि कोई हरियाणा के गुरूग्राम से अपने बीमार को पिता को साइकिल पर बिठाकर दरभंगा चली आ रही है तो कोई पिता के परदेस में फंसे होने के कारण खुद मां की अर्थी को कंधा देती है और अपने गुल्लक फोड़कर जमा किए गए पैसों से उनका अंतिम संस्कार करतीं हैं। ऐसा ही एक मामला छपरा जिले के मांझी प्रखंड से सामने आया है, जहां मां के निधन के बाद पिता की गैरहाजिरी में बेटियों ने मां को मुखाग्नि दी। घर मे फूटी कौड़ी नही थी तो गुल्लक को तोड़कर दाह संस्कार का इंतज़ाम किया।

मां की अर्थी को कंधा देते हुए सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने वाली यह खबर मांझी प्रखंड के फतेहपुर सरैया की है जहां राजबलम सिंह कुशवाहा की पत्नी राजमुनी देवी चार दिन पहले कमर और पैर दर्द से पीड़ित हो गईं। उन्हें स्थानीय चिकित्सक से दिखाया गया, लेकिन रविवार की रात खाना खाने के बाद बेहोश हुईं और उनका देहावसान हो गया। राजबलम गुजरात के सूरत में लॉकडाउन की वजह से फंसे हुए हैं। उनके लौटने की कोई उम्मीद ना देखते हुए तीन बच्चियों के होश फाख्ता हो गए, लेकिन बेटियों ने हिम्मत नहीं हारी।

उनकी शवयात्रा निकाली गई तो घर मे मौजूद पूनम, काजल और नेहा ने कंधा दिया। शमशान घाट पर मुखाग्नि देने की बारी आई तो लोग अपनी-अपनी राय जाहिर करने लगे, लेकिन पांचवीं पुत्री नेहा ने साहस का परिचय देते हुए स्वयं मुखाग्नि देने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने भी बच्ची के साहस को स्वीकारते हुए उसका आग्रह स्वीकार कर लिया। अंतिम संस्कार से लौटने के बाद जीविका दीदियों ने साढ़े आठ हजार रुपये की तत्कालीन मदद की और समाज़सेवी पूर्व जिलापार्षद धर्मेंद्र सिंह समाज और स्थानीय मुखिया संजीत कुमार साह ने पांच-पांच हज़ार रुपये और खाद्य सामग्री की मदद मुहैया कराई है। धर्मेंद्र सिंह समाज ने बहादुर बेटियों की जिम्मेवारी लेने का वचन दिया है।

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