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सेंट्रल यूनिवर्सिटी के वीसी पर एमएचआरडी को गुमराह करने का आरोप

सेंट्रल यूनिवर्सिटी के वीसी पर एमएचआरडी को गुमराह करने का आरोप

मोतिहारी। महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्विद्यालय के कुलपतियों का विवाद एवं उनकी खुद की कुलपति पद पर नियुक्ति एवं उनके द्वारा किये गए शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक पदों पे की गई नियुक्तियां और पद्दोन्नतियां हमेशा से विवाद के घेरे में रहती आई है।  विश्विद्यालय के पहले कुलपति अरविन्द अग्रवाल की जर्मनी की फर्जी पीएचडी डिग्री की साया और  उनके द्वारा किये गये नियुक्तियों पे एमएचआरडी, यूजीसी और सेंट्रल विजिलेंस कमिशन की जाँच अभी लम्बित थी । तबतक दूसरे कुलपति प्रोफेसर संजीव शर्मा फर्जीवाड़े के बल पर एमएचआरडी और राष्ट्रपति भवन कार्यालय को गुमराह करके अप्रैल 2019 में कुलपति का पद ग्रहण करने का आरोप लगा। 27 दिसंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट दिल्ली के अधिवक्ता डॉ संदीप पहल ने एमएचआरडी के सचिव को प्रोफेसर संजीव शर्मा पे विजिलेंस जाँच की तथ्य छुपाकर अवैध तरीके से कुलपति पद हासिल करने की शिकायत सबूतों के आधार पर ईमेल के द्वारा किया था। डॉ पहल कुलपति शर्मा की चौधरी चरण सिंह विश्विद्यालय में प्रोफेसर के पद पे किये गए अवैध पदोन्नति, महिला शोध छात्रा को शराब पीकर अश्लील बातें करना एवं मानसिक उत्पीड़न से लेकर शिकायत किया था।  संजीव शर्मा पर फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के आरोप में सही पाने पर विश्विद्यालय के एक्सक्यूटिव कौंसिल द्वारा उनके ऊपर डिस्प्लीनरी कमिटी बनायीं गयी थी।  इसके आलावा डॉ पहल ने अपने शिकायत संख्या 4 में कुलपति संजीव शर्मा पर महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्विद्यालय में किये गए 60 से अधिक शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक पदों पे की गई नियुक्तियां और पद्दोन्नतियां को सरकार के विभिन्न नियमों का उलंघन करने के कारण अवैध बताया था । 

एमएचआरडी के अपर सचिव श्री एस के विश्वास  के 5 फरवरी 2020 को डॉ पहल के इस शिकायत के जवाब में संजीव शर्मा ने लिखा है की यह शिकायत शिकायतकर्ता के अज्ञान पर आधारित है।  सत्य यह है की एक्सक्यूटिव कॉउन्सिल  ने अपनी दिनांक 21 मई 2019 की 14वीं बैठक के संकल्प संख्या 14. 03 के माध्यम से कुलपति को साक्षात्कार पैनल के सदस्य नामित करने हेतु अधिकृत किया था।  विश्विद्यालय की समस्त कार्यवाही अधिनियम, परिनियमावली तथा विधिक व्यवस्थाओं के अनुरूप संचालित की जा रही है। जबकि एक्सक्यूटिव कॉउन्सिल की   14 वीं बैठक के  मिनट ऑफ मीटिंग में एक्सक्यूटिव कॉउन्सिल द्वारा साक्षत्कार के लिए  विषय विशेषज्ञ को साक्षत्कार में बुलाने की मंजूरी दी । समाजसेवी आलोक राज ने संजीव शर्मा द्वारा एक्सक्यूटिव कॉउन्सिल के मिनट में छेड़छाड़ करने की आशंका भी जताई है , वही वीसी के द्वारा एमएचआरडी को गुमराह करने का भी आरोप लगाया है।

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