लॉक डाउन से भारत को दो-दो वायरस से लडना पड रहा है



अर्जुन कुमार/नरकटियागंज

भारत को वर्तमान में देश की हालत बहुत भयावह हो गई है हमें दो-दो वायरस से लड़ना पड रहा है भारत ऐसी जगह खड़ी है  जिसमें आगे मौत तो पीछे खाई है  दरवाजे पर कोरोना वायरस खड़ा है और 40 से 50 % लोगों के घर के अंदर गरीबी का वायरस पड़ा है इससे कैसे लड़ेगा, भारत सरकार एक तरफ बाहर विदेश से लोगों को लाने के लिए स्पेशल ऐरोप्लेन की व्यवस्था करती है यही विदेश से आने और लाने वाले लोगों के कारण हम भारतवासी को ये दिन देखना पड रहा है वही जो लोग प्रदेश कमाने खाने और घर की अवश्कताओ के लिए दूर अपने परिवार को छोड़ कर गए है क्योंकि उनके राज्य में किसी भी तरह का कोई रोजगार की व्यवस्था नहीं है अब उनको सरकार कहती है जो जहां है वो इस लोकडाउन में वही रहे बात तो यहां तक सही है सरकार ने सभी मकान मालिक को भी ये निर्देश दिये है कि कोई भी मकान मालिक अपने किराएदारों को ना निकले  लेकिन क्या सरकार को ये पता नहीं चल रहा के सरकार के इस फरमान के  बाद भी मकान मालिक अपने घर से उन सभी बे सहारा को भगा रहे है इधर प्रशासन सभी को लाकडाउन सफल करवाने पे तुले है जो इस मुश्किल परिस्थितियों को नहीं समझ रहे उनको प्रशासन अपने तरीके से समझा रही है लेकिन उनकी क्या जो बाहर प्रदेश से अपने घर पैदल आने को मजबुर है उनकी परेशानी नहीं दिख रही क्या उनको उनके सही स्थान पे पहुंचा के लॉक डाउन को सफल नहीं बना सकते क्या सिर्फ रोड गली मोहललों में घूम घूम लाठी मर के है लॉक डाउन पूरा होगा एक तरफ सरकार की योजना सुन कर गरीबों तो खुश हो रहे हैं लेकिन कब ओर कैसे मिलेगा उनको य भी एक परेशानी दिखती है। सरकार को उन पर भी ध्यान देना चाहिए जो दूर प्रदेश से अपने घर पैदल आ रहें है वो भी बिना शोसल डिस्टेंस के इससे लॉक डाउन को सफल बनाने में और कोरोना को हराने में सरकार और आम जन नागरिक जो मेहनत  कर रहे हैं उनपर कहीं पानी ना फिर जाए बस सरकार उनके लिए भी कुछ उचित व्यवस्था कर दे जो लोग दूर प्रदेश से 500 से 600 km चल कर अपने घर आ रहे हैं और बीसी जो भारत छोड़ के जाते है विदेश और कहते है इंडिया में कुछ नहीं रखा है चलो विदेश चलते जिनके कारण आज इंडिया में कोरोना फैला है। और बाद में कहीं दूसरे देश में फस जाओ तो सरकार हमें बचा लो रोने ओर गिड़गिड़ाने लगते हैं उनको सरकार प्लेन की व्यवस्था करेगी लेकिन इन गरीबों का क्या जिनको तो उनके सेठ ने तो किसी को जिस फैक्ट्री में काम करते थे उसने किसी को मकान मालिक ने भागा दिया उन बेचारों का क्या होगा जो रास्ते में भूखे मर रहे हैं  उनकी जान कोरोना से जाए या ना जाए लेकिन इस हालत में भूखे जान तो पक्का चला जाऐगा। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार ऐसे गरीबों को उनके घरो तक पहुचाने की व्यवस्था करे ताकि ऐसा भयवाह स्थिति  कोरोना से ज्यादा भूखे न हो।

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