मधेपुरा लॉकडॉन ! पांचवें दिन भी शहर मे दिखा व्यापक असर

रूपेश कुमार
मधेपुरा । जिला मुख्यालय स्थित - शहर के विभिन्न चौक चौराहे पर शनिवार को लॉकडॉन का असर जिलेभर में दिखा गया। इस दौरान पुलिस ने भी सख्ती दिखाई साथ ही शहर के सभी चौक चौराहे पर ड्यूटी पर तैनात पुलिस एवं कमांडो टीम के द्वारा एक हजार से लेकर दो हजार तक  दर्जनों वाहन के  चालकों से जुर्माना भी वसूला गया।
साथ ही सरकार के द्वारा चलाए गए, लॉकडाउन का पालन सुनिश्चित कराने के दौरान शायद पुलिस कर्मी बार-बार इस बात को नजरअंदाज कर रहे हैं कि मरीजों और आवश्यक सेवा से जुड़े लोगों को इसमें राहत दी गयी।फिर भी पुलिस , प्रशासन की आदेश का उल्लंघन करते हुए, अपने मनमानी तरीके से कई जगहों पर अस्पताल जाने या फिर लौट रहे मरीजों के परिजनों के साथ न केवल सख्ती दिखायी गयी बल्कि मरीज की हालत दिखाए जाने के बाद भी डंडे से पिटाई कर उससे उठक-बैठक भी कराये जाते है। इतना ही नहीं पत्रकारों से वगैर पूछताछ किए अपशब्द का प्रयोग करते है पुलिसकर्मी ।  बगैर पूछे  किसी व्यक्ति पर लाठीचार्ज कर देते हैं पुलिस कर्मी । जिससे आम लोगों ने जताया आक्रोश। पुलिसकर्मियों ने लोगों को समझाने बुझाने के बदले केवल पिटाई करते है। आप देख सकते हैं कि किस तरह से पुलिस लोगों पर डंडे चलाते है।
अपने जरूरी काम से बाजार निकले हुए लोगों को पुलिस कर्मियों ने उनकी बाइक को रोक कर हवा भी निकाल देते। और गाली-गलौज भी करते हैं।
लॉकडाउन के दौरान शनिवार को शहर में इक्का-दुक्का अधिकांश वैसे लोग ही सड़क पर दिखे गए जिन्हें आवश्यक कार्य को लेकर घर से बाहर निकलने  उनके लिए मजबूरी थी,
 हालांकि प्रशासनिक सख्ती के दौरान सदर अस्पताल जा रहे या फिर डॉक्टर से इलाज कराके लौट रहे । मरीज के स्थिति की जानकारी देने और अस्पताल की पर्ची दिखाने के बाद भी पुलिस कर्मी नहीं मानते। ऐसे कई मामले शनिवार के दिनभर देखने को मिले। यदि कोई रोगी अपने बीमारियों  के इलाज के लिए डॉक्टर के पास जा रहे हैं। वैसे लोगों को भी कई जगहों पर परेशानी हो रही है । साथ ही लॉकडॉन के दौरान मरीजों के लिए इलाज के लिए कोई साधन नहीं है।
जहां  इलाज के लिए चार किलोमीटर से बूढ़े व बच्चे गोद में उठा के पैदल चल कर आए सदर अस्पताल जहां डॉक्टरों की लापरवाही से नहीं हुआ मरीजों का इलाज। ऐसा क्यों?
क्या इस दौरान प्रशासन भी है मौन?

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