नीतीश कुमार की ह्रदयहीनता का परिचायक है उपेन्द्र कुशवाहा का आमरण अनशन : राजीव मिश्र

पटना: बिहार में शैक्षणिक कुव्यवस्था के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठे उपेंद्र कुशवाहा के समर्थन में आये वीआईपी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजीव मिश्र ने इसे मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की ह्रदयहीनता का परिचायक बताया। इससे पहले उन्‍होंने पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष मुकेश सहनी से इस बारे में विमर्श किया और पटना में कुशवाहा का समर्थन करने का फैसला किया। उसके बाद उन्‍होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नीतीश सरकार पर जमकर हमला बोला।
राजीव मिश्र ने कहा कि बिहार की शैक्षणिक कुव्यवस्था जगजाहिर है। इसके लिए हर व्यक्ति, हर दल को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सोचने और सूबे में शिक्षा की स्थिति बेहतर बने, इसके लिए कुछ खास करने की जरूरत है।  इसके लिए पटना में, देश का एक पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री शिक्षा से जुड़ी कुछ मुद्दों को लेकर पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर बैठा है और शिक्षा को लेकर संवेदनहीन बन चुकी राज्य की सरकार को इसका कोई परवाह नहीं है। यह बेहद दुर्भाग्‍यपूर्ण है। 

उन्‍होंने कहा कि रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय उपेन्द्र कुशवाहा जी अपनी मांगों को लेकर अनशन से पहले सूबे के महामहिम, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मिलने का गुहार लगा चुके हैं। किसी ने मिलने का समय नहीं दिया तो अंतिम विकल्प के तौर पर आमरन अनशण पर बैठ गए। लेकिन प्रदेश का दुर्भाग्य देखिए कि पिछले चार दिनों से सरकार की ओर से उनकी खोज-खबर लेना किसी ने जरूरी नहीं समझा। मिश्र ने पूछा कि कोई सरकार आखिर इतनी संवेदनहीन कैसे हो सकती है। प्रदेश में दो और केन्द्रीय विद्यालय खुले और इसके लिए बिहार सरकार केन्द्रीय विद्यालय संगठन को औरंगाबाद और नवादा में जमीन मुहैया करा दे, आखिर यह कौन सी बड़ी मांग है जिसे बिहार सरकार पूरा नहीं कर सकती है।
उन्‍होंने कहा कि उपेन्द्र कुशवाहा की यह मांग अपनी निजी लाभ के लिए तो नहीं है। उपेन्द्र कुशवाहा केन्द्रीय शिक्षा राज्य मंत्री रहते हुए पूरे देश भर में 13 केन्द्रीय विद्यालय खोलने की अनुमति दी थी जिनमें से दो बिहार में खोले जाने थे, लेकिन राज्य का दुर्भाग्य देखिए कि सरकार ने इसके लिए अभी तक जमीन नहीं दी। उपेन्द्र जी आज भी उसी के लिए संघर्षरत हैं।   

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