ऑटोमोबाइल डिप्लोमा की फर्जी डिग्री देकर करोड़ों ठगी के मामले में एआईसीटीई के दो निदेशक समेत 11 पर केस

PATNA: ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा कोर्स कराने के नाम पर हुए फर्जीवाड़ा-घोटाला को लेकर निगरानी ने एफआईआर दर्ज की है। इसमें अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के दो निदेशक डॉ. ए कलानिधि व रवि चंद्रण समेत कुल 11 नामजद आरोपी हैं। यह मामला गया के मगध टेक्निकल ट्रेनिंग काॅलेज से जुड़ा है। आरोप है कि परिषद के अधिकारियों व मगध टेक्निकल ट्रेनिंग काॅलेज के अफसरों ने मिल कर वर्ष 1994 से 2018 के बीच छात्र व अभिभावकों से करोड़ों रु. की अवैध वसूली की गई।
कॉलेज को मान्यता ही नहीं, बांटीं डिग्रियां
दरअसल मगध टेक्निकल ट्रेनिंग काॅलेज ही फर्जी निकला। बिना किसी मान्यता या अन्य तकनीकी प्रक्रिया को पूरा किए ही इसका संचालन किया जा रहा था। काॅलेज के जरिए आॅटो मोबाइल इंजीनियरिंग के डिप्लोमा कोर्स की फर्जी डिग्री देकर छात्रों से लंबे समय तक मोटी राशि (करोड़ों रुपए) की उगाही की गई। निगरानी की आरंभिक जांच में पता चला है कि यह संस्थान अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त नहीं है। साथ ही इसे बिहार विज्ञान एवं प्रावैधिकी संस्थान से भी संबद्धता नहीं मिली थी। 
छात्र की शिकायत पर लोकायुक्त ने दिए 
थे जांच के आदेश, सही पाई गई शिकायत
एक पीड़ित छात्र चंदन कुमार ने लोकायुक्त से शिकायत की थी। लोकायुक्त ने निगरानी को जांच के आदेश दिए थे। जांच में शिकायत सही पाई गई। 7 फरवरी 2019 को निगरानी ने प्रारंभिक रिपोर्ट लोकायुक्त को सौंपी थी। निगरानी थाने में दर्ज एफआईआर मंगलवार को निगरानी के विशेष न्यायाधीश मधुकर कुमार के कोर्ट को साैंपा गया। इसके आधार पर विशेष मुकदमा कायम किया गया है। कोर्ट ने निगरानी को अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए 21 दिसंबर की तारीख दी है। 
आगे क्या : होगी पूछताछ व गिरफ्तारी भी | आरोपियों से पूछताछ होगी। गिरफ्तारी भी हो सकती है।
 
इनपर प्राथमिकी 

  • डॉ. ए कलानिधि व रवि चंद्रण - निदेशक, एआईसीटीई 
  • डॉ. आरपी सिंह - उप निदेशक, एआईसीटीई  
  • राजेश कुमार - तत्कालीन निदेशक, मगध टेक्निकल ट्रेनिंग कालेज 
  • पीवी पार्थसारथी -अध्यक्ष सह महासचिव, दी इंस्टीट्यूट ऑफ मोटर इंडस्ट्री (इंडिया), चेन्नई 
  • प्रमोद गुप्ता, अभिमन्यु सिंह, रूबी कुमारी, शिवेश पांडेय, पीके साहु और आईके भट्ट।

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