विशेश्वर ओझा हत्याकांड के मुख्य गवाह की हत्या मामले में जदयू नेता व रिटायर्ड फौजी गिरफ्तार

रिपोर्ट तारकेश्वर प्रसाद

आरा। भोजपुर जिले में करनामेंपुर ओपी थाना क्षेत्र के सोनबरसा के समीप बहुचर्चित भाजपा नेता विशेश्वर ओझा हत्याकांड के मुख्य गवाह कमल किशोर मिश्र की हत्या में पुलिस की कार्रवाई तेज हो गयी है। पुलिस ने इस मामले में जदयू प्रखंड अध्यक्ष व रिटायर फौजी को गिरफ्तार कर लिया है। तीन लाइसेंसी हथियार भी जब्त किये गये हैं। गिरफ्तार लोगों में शाहपुर प्रखंड के जद (यू) अध्यक्ष मुक्तेश्वर मिश्र व रिटायर फौजी उमाशंकर मिश्र हैं। दोनों करनामेपुर ओपी के सोनवर्षा गांव के रहने वाले हैं। जद (यू) अध्यक्ष मुक्तेश्वर मिश्र की गिरफ्तारी आरा के गिरजा मोड पकड़ी से की गयी है। वहीं इस बहुचर्चित हत्याकंड में इनामी ब्रजेश मिश्र समेत पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है।

मृतक कमल किशोर मिश्र के पिता श्रीमन नारायण मिश्र के बयान पर एफआईआर की गयी है। इसमें शिवाजीत मिश्र के बेटे ब्रजेश मिश्रा, किशुन मिश्र के अलावे उमाशंकर मिश्र, मुक्तेश्वर मिश्र व राम अवतार उर्फ राजकिशोर पाल को आरोपित किया गया है। इधर, प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एसआईटी की टीम अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी में जुट गयी है। इसके लिए शुक्रवार की पूरी रात छापेमारी चलती रही। आरोपितों की खोज में पुलिस यूपी के नवरंगा तक पहुंच गयी थी। सोनवर्षा, ईश्वरपुरा, आरा के पकड़ी और ब्रजेश व किशुन के ससुराल तक छापेमारी की गयी। इसी क्रम में उमाशंकर मिश्र को उनके घर व मुक्तेश्वर मिश्र को पकड़ी से गिरफ्तार कर लिया गया। विदित हो कि शुक्रवार की सुबह करनामेपुर ओपी के सोनवर्षा गांव में कमल किशोर मिश्र को गोलियों से भून दिया गया था।

फौजी के घर से मिले तीन हथियार व गोलियां

कमल किशोर मिश्रा की हत्या के बाद पुलिस ने सोनवर्षा गांव में भी सघन छापेमारी की गयी। इस दौरान फौजी उमाशंकर मिश्र को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके घर से एक राइफल, एक बंदूक व प्वाइंट .32 की एक रिवाल्वर व करीब दर्जन भर कारतूस गोलियां बरामद की गयी है। हालांकि सभी हथियार लाइसेंसी बताया जा रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार उमाकांत का भगोड़ा है। उसके पास से बरामद हथियारों की जांच की जा रही है।

इनामी ब्रजेश मिश्र की गिरफ्तारी पुलिस के लिए चुनौती

पचास हजार के इनामी ब्रजेश मिश्रा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस उसके हर ठिकानों पर दबिश दे रही है। इसके तहत पुलिस उसके ससुराल से लेकर नवरंगा तक पहुंच गयी। हालांकि उसका सुराग नहीं मिल पा रहा है। अब पुलिस उसके नये ठिकानों की तलाश कर रही है। बताया जाता है कि ब्रजेश मिश्र का यूपी से लेकर कोलकाता तक ठिकाना रहा है। भाजपा नेता की हत्या के बाद उसने उन जगहों पर पनाह ली थी। तब पुलिस भी उन ठिकानों तक भी पहुंच गयी थी। इसी क्रम में उसका भाई व इनामी हरेश मिश्र कोलकाता में पुलिस की पकड़ में आ गया था। लेकिन दो साल बाद तक ब्रजेश मिश्र पुलिस के हाथ नहीं लग सका है। अब तो उसकी गिरफ्तारी भोजपुर पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गयी है। भाजपा नेता हत्याकांड के मुख्य गवाह की हत्या में उसका नाम आने के बाद पुलिस की चुनौती और भी बढ़ गयी है। बताया जा रहा है कि उसकी गिरफ्तारी को लेकर पुलिस छापेमारी करती रही और उसने भाजपा नेता हत्याकांड के मुख्य गवाह को दिनदहाड़े टपका दिया। फरार रहने की स्थिति में वह अपने गांव आता रहा और पुलिस उसे पड़ने के लिए हाथ मलती रही। उसके गांव आने की सूचना पर पुलिस ने कई बार छापेमारी भी की, उसे पकड़ने में सफलता नहीं मिल सकी।‘दुआ करो कि सलामत रहे मेरी हिम्मत, ये चिराग कई आंधियों पर भारी है’
‘मैं कतरा होके भी तूफां से जंग लड़ता हूं,
मुझे बचाना समंदर की जिम्मेदारी है। दुआ करो कि सलामत रहे मेरी हिम्मत, ये चिराग कई आंधियों पर भारी है।’ यह पंक्ति भाजपा नेता विशेश्वर ओझा हत्याकांड के मुख्य गवाह कमल किशोर मिश्र ने अपने फेसबुक पर पोस्ट की थी। लेकिन अफसोस, ना किसी की दुआ काम आयी और न बचाने समंदर आ सका। एक आंधी ने चिराग को हमेशा के लिए बुझा दिया। बताया जाता है कि जुलाई माह में सोनवर्षा गांव निवासी व भाजपा नेता हत्याकांड के मुख्य गवाह कमल किशोर मिश्रा के घर पुलिस ने छापेमारी की गयी थी। उसके बाद 25 जुलाई को उन्होंने एक पोस्ट किया था। उसमें छापेमारी की निंदा की गयी थी। उसी पोस्ट में यह उपरोक्त पंक्ति भी लिखी गयी थी। महज इस चार लाइन से ही कमल किशोर मिश्र की कहानी बयां कर देती है।

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