डीडीसी का ग्रामीण आवास सहायक को जेल भेजने का निर्देश निकला हवा हवाई,पीआर बांड पर आवास सहायक को किया गया मुक्त

बिहार/आरा रिपोर्ट तारकेश्वर प्रसाद (TbnMedia)

आरा।भोजपुर जिले के उपविकास आयुक्त शशांक शुभंकर द्वारा आवास सहायक पर लाभार्थी से नजराना मांगने व बैंक से रूपए निकासी की रोक लगाने पर जेल भेजने का निर्देश हवा हवाई साबित हुआ है। आवास सहायक को गजराजगंज ओपी पुलिस ने साक्ष्य के आभाव में पीआर बांड भरावकर थाने से मुक्त कर दिया गया है। दरअसल भोजपुर उपविकास आयुक्त शशांक शुभंकर ने शनिवार को उदवंतनगर प्रखंड के कारीसाथ पंचायत के ग्रामीण आवास सहायक अरूण कुमार सिंह को इंदिरा आवास के लाभार्थी नुशेरा खातून की शिकायत पर 20 हजार रुपए नजराना मांगने व बैंक से रूपए निकासी नही करने का हवाला देकर अपने चैंबर में नवादा थानाध्यक्ष को बुलाकर आवास सहायक को जेल भेजने का निर्देश दिया गया था। इस दौरान डीडीसी द्वारा मीडिया को संबोधित करते हुए है यह भी कहा गया था कि आवास सहायक के खिलाफ मिले साक्ष्य के आधार उनका तत्काल सेवा मुक्त कर आवास सहायक को जेल भेजा जा रहा है साथ ही उदवंतनगर प्रखंड विकास पदाधिकारी के वेतन भुगतान पर रोक व बैंक मैनेजर की इस मामले में संदिग्ध होने की जांच का निर्देश दिया था।लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि जब डीडीसी के पास उक्त साबुत होने का दावा किया जा रहा है तो फिर पुलिस द्वारा किस आधार पर आवास सहायक को पीआर बांड पर छोड़ने का काम किया गया है। जबकि आवास सहायक का कहना है कि लाभार्थी नुशेरा खातून द्वारा लगाया गया आरोप बिल्कुल बेबुनियादी है आवास सहायक ने बताया कि कागजात के रूप में लाभार्थी से शपथ पत्र मांगा जाता है लाभार्थी द्वारा जब शपथ पत्र नही दिया गया तो वरीय अधिकारी के निर्देश पर उनके रूपये निकासी की रोक लगाई गई थी। बहरहाल डीडीसी के साक्ष्य का दावा और आवास सहायक के बेबुनियादी आरोप के बाद ग्रामीण आवास सहायक संघ और डीडीसी के इस निर्णय के बीच रार ठन गई है। अब देखना यह होगा कि आवास सहायक द्वारा लाभार्थी से 20 हजार रुपए मांगने का साक्ष्य सार्वजनिक किया जाएगा या फिर हवा में ही दोनो तरफ से इस मामले में तीर चलाई जाएगी।

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